पीले मौजेक रोग के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। ऐसे में 500 रुपये प्रति बीघा का मुआवजा किसानों की लागत या मजदूरी का भी हिस्सा नहीं निकाल पा रहा है।
यह मुआवजा राशि नहीं छलावा राशि है - कांग्रेस नेता मांगरिया
जनसंवाद न्यूज़, मंदसौर।
प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा किसानों को सोयाबीन फसल खराब होने पर दी गई मुआवजा राशि को लेकर कांग्रेस ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेता प्रवीण मांगरिया ने कहा कि किसानों के खातों में जो राशि आई है, वह मुआवजा नहीं बल्कि छलावा राशि है। भाजपा सरकार इस वितरण का राजनीतिक श्रेय तो ले रही है, लेकिन हकीकत में किसानों को राहत नहीं, निराशा मिली है। मांगरिया ने बताया कि किसानों को प्रति बीघा मात्र 400 से 600 रुपये तक का मुआवजा दिया गया है। जबकि सामान्य परिस्थितियों में एक बीघा सोयाबीन से किसान को 20 से 25 हजार रुपये तक की आमदनी होती। लेकिन इस बार खराब मौसम और पीले मौजेक रोग के कारण फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। ऐसे में 500 रुपये प्रति बीघा का मुआवजा किसानों की लागत या मजदूरी का भी हिस्सा नहीं निकाल पा रहा है।कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि फसल नुकसान का सर्वे कार्य भी सही तरीके से नहीं किया गया, जिससे कई किसान मुआवजे से वंचित रह गए।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार किसानों के साथ दोहरा खेल खेल रही है — पहले मुआवजा के नाम पर छलावा और अब भावांतर योजना के नाम पर धोखा, क्योंकि जब उत्पादन ही नहीं हुआ, तो भावांतर योजना का क्या औचित्य है। मांगरिया ने कहा कि प्रदेश में किसानों को वास्तविक मुआवजा तो कांग्रेस की कमलनाथ सरकार ने दिया था, जिसे आज भी क्षेत्र का किसान याद करता है।
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