मंदिर समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, प्रतिमा वर्ष 1929 में नाहर सय्यद दरगाह के पास स्थित तालाब से मिली थी। इसे नरसिंहपुरा ले जाकर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। प्रतिमा को बैलगाड़ी से ले जाया जा रहा था, लेकिन वर्तमान गणपति चौक के पास पहुंचते ही बैलगाड़ी रुक गई।
बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी तो यहीं रुक गए बप्पा, अब दोनों ओर से होते हैं दर्शन
जनसंवाद न्यूज़ मंदसौर।
गणेश चतुर्थी के अवसर पर गणपति चौक स्थित प्रसिद्ध द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में 12 दिवसीय धार्मिक आयोजन शुरू हो गए हैं। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। करीब 8 फीट ऊंची गणेश प्रतिमा की खासियत यह है कि एक ही शिला पर बनी इस प्रतिमा के आगे और पीछे, दोनों ओर से दर्शन किए जा सकते हैं।
मंदिर समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, प्रतिमा वर्ष 1929 में नाहर सय्यद दरगाह के पास स्थित तालाब से मिली थी। इसे नरसिंहपुरा ले जाकर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। प्रतिमा को बैलगाड़ी से ले जाया जा रहा था, लेकिन वर्तमान गणपति चौक के पास पहुंचते ही बैलगाड़ी रुक गई। कई प्रयासों के बावजूद बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। बाद में क्षेत्र का नाम भी गणपति चौक पड़ा।
एक ओर पंचमुखी, दूसरी तरफ सेठ स्वरूप
प्रतिमा के उत्तर दिशा वाले भाग में पंचमुखी गणपति का स्वरूप है। इसमें पांच सूंड और चार हाथ दिखाई देते हैं। वहीं दक्षिण दिशा से भगवान गणेश पगड़ी पहने सेठ के स्वरूप में नजर आते हैं। इसी कारण इन्हें सेठ गणेश भी कहा जाता है। मंदिर समिति के अनुसार, इस अनूठी प्रतिमा के दर्शन के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु मंदसौर पहुंचते हैं। गणेश चतुर्थी के तहत मंदिर में आगामी 12 दिनों तक पूजन, हवन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे। प्रतिदिन रात 8 बजे विशेष महाआरती का आयोजन किया जाएगा।
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